मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बुधवार को वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVCMC) के डी.एम. पेटिट अस्पताल में मरीजों को कथित तौर पर एक्सपायर्ड दवाएं दिए जाने के मामले में जांच के आदेश दिए। देवेंद्र फड़णवीस ने शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को विस्तृत जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
यह मामला शुक्रवार को उस समय सामने आया जब भाजपा के पार्षदों ने अस्पताल का निरीक्षण किया और अस्पताल के स्टोर रूम में एक्सपायर्ड दवाएं मिलने का दावा किया। इस खुलासे के बाद सोमवार को VVCMC के आयुक्त मनोज कुमार सूर्यवंशी ने मामले की जांच के आदेश दिए और कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि मरीजों को अस्पताल के बाहर निजी मेडिकल दुकानों से महंगी ब्रांडेड दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता था, जबकि अस्पताल का स्टाफ यह कहता था कि सरकारी अस्पताल में दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
भाजपा के गुटनेता अशोक शेलके ने, जिन्होंने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के सामने उठाया, दावा किया कि 2022 और उससे पहले की एक्सपायरी डेट वाली दवाएं मरीजों को मूल पैकिंग की बजाय ढीले पैकेट में दी जा रही थीं ताकि एक्सपायरी की जानकारी छिपाई जा सके। अशोक शेलके ने यह भी बताया कि अस्पताल के दो अधिकारी — जितेंद्र पाटिल और रोहिणी पाटिल — 2014 से स्टोर रूम का प्रबंधन कर रहे थे, जबकि नियमों के अनुसार समय-समय पर उनका तबादला होना चाहिए था।
इसे “ड्रग घोटाला” बताते हुए अशोक शेलके ने विस्तृत जांच की मांग की और कहा कि कथित अनियमितताओं में वे अस्पताल कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं जो दवाओं की आपूर्ति की मांग भेजने और सप्लायर्स को वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए जिम्मेदार हैं। बता दें कि VVCMC की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी हैं।
